स्वाधीनता दिवस स्वाभिमानियों का
by Suman Mishra on Wednesday, 15 August 2012 at 01:07 ·

कहीं रोशनी सजी हुयी है , कही लड़ी है फूलों की
हल्का सा कोलाहल फैला , मगर बात कुछ और ही है
बंदूकों की गोली क्या बस एक पटाखा फटा कहीं
जश्न कहाँ आजादी कैसी , यहाँ बात कुछ और ही है
अनशन और हड़ताल की बातें आम हुयी है लोगों में
सत्ता के गलियारे सूने ,सूना ? बात कुछ और ही है
ढूढ़ रहा आजादी इन्सां इन ६५ सालों में खुद
एक बूँद पानी को तरसा , अबकी बात कुछ और ही है

बड़ी बड़ी तस्वीरों में भारत माँ की जो झांकी है
क्या सच में ये सत्य है या फिर बात वही फिर बाकी है
गढ़ते रहना वर्षों से आजादी के किस्सों को तुम
पर शहीद की बात ना करना इतनी बड़ी आबादी है
अपना हक़ और अपनी बातें सब मसरूफ ज़माने में
पर हल क्या निकला कुछ भी नहीं तो बातों की बर्बादी है

रक्त बहा था , प्राण थे छूटे,फांसी का फंदा लटका
गले लगा कर झूल गए थे , भारत माँ तब शहजादी थी
बडे जतन से बेड़ियाँ तोड़ी , आज्दादी तब रानी थी
आज यहाँ किस्सों के जैसी एक कहानी नानी की
बड़ा दुखद है दृश्य देश का, क्या आजाद हुए हैं हम
जहरीली मुस्कान सभी की ,कभी मिली आजादी थी ? जो अब मिलेगी,,,,
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें